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Vishnu Chalisa – Sampark Gujarati

by samparkgujarati
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॥ दोहा ॥

विष्णु सुनिए विनय सेवक की, चित लाय।

कीरत कुछ वर्णन करूं, दीजै ज्ञान बताय॥

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॥ चौपाई ॥

नमो विष्णु भगवान खरारी।

कष्ट नाशक अखिल बिहारी॥

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।

त्रिभुवन फैली उजियारी॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत।

सरल स्वभाव मोहिनी मूरत॥

तन पर पीताम्बर अति सोहत।

बैजयंती माला मन मोहत॥

शंख चक्र कर गदा विराजे।

देखत दैत्य असुर दल भाजे॥

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।

काम क्रोध मद लोभ न साजे॥

सन्तभक्तजन के तुम साथी।

असुर निकन्दन नाथ प्रभु त्राता॥

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पालनकर्ता जग के स्वामी।

भक्त वत्सल अन्तर्यामी॥

जग में व्यापे सर्वत्र तुम ही।

अदृश्य रूप में सदा रहो तुम ही॥

लीला कर तुम जग को धारा।

रूप अनेक किया अवतारा॥

मत्स्य रूप धरि जग को तारा।

कूर्म रूप धरि मंदर धारा॥

वराह रूप धरि असुर संहारा।

नृसिंह रूप धरि भक्त उबारा॥

वामन बनि बलि से दान लिया।

परशुराम बनि क्षत्रिय हनन किया॥

राम रूप धर रावण मारा।

कृष्ण रूप धर कंस संहारा॥

बुद्ध रूप धर ज्ञान फैलाया।

कल्कि रूप धर दुष्ट मिटाया॥

हे प्रभु दीनन के दुखहारी।

भक्तन के तुम सदा सहारी॥

जो कोई तुमको ध्यावे मन से।

सब संकट कटे क्षण भर में॥

जो यह पाठ करे मन लाई।

सुख संपत्ति घर आवे भाई॥

दुःख दरिद्र दूर सब होवे।

जीवन में सुख शांति संजोवे॥

जो जन पढ़े विष्णु चालीसा।

होय सिद्धि साक्षी जगदीशा॥

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॥ दोहा ॥

विष्णु चालीसा जो पढ़े, प्रेम सहित मन लाई।

सकल कामना पूर्ण हो, प्रभु कृपा नित्य पाई॥

|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ||

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