Home DevotionalGanesh Chalisa – Sampark Gujarati

Ganesh Chalisa – Sampark Gujarati

by samparkgujarati
0 comments 14 views

॥ दोहा ॥

जय गणपति सद्गुण सदन, कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

image 20

॥ चौपाई ॥

जय जय जय गणपति गणराजू।

मंगल भरन करण शुभ काजू॥

जय गजवदन सदन सुखदाता।

विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥

वक्र तुंड शुचि शुण्ड सुहावन।

तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजत मणि मुक्तन उर माला।

स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुटार त्रिशूला।

मोदक भोग सुगन्धित फूला॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित।

चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।

गौरी लालन विश्व-विख्याता॥

ऋद्धि सिद्धि तव चंवर सुधारे।

मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी।

अति शुचि पावन मंगलकारी॥

image 22

एक समय गिरिराज कुमारी।

पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।

तब पहुँचे तुम धरि द्विज रूपा॥

अतिथि जानि कै गौरी सुखारी।

बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा।

मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला।

बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना।

पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कहि अंतर्ध्यान रूप ह्वै।

पालना पर बालक स्वरूप ह्वै॥

बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना।

लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥

सकल मगन सुख मंगल गावें।

नभ ते सुरन सुमन वर्षावें॥

शंभु उमा बहुदान लुटावें।

सुर मुनिजन सुत देखन आवें॥

लखि अति आनंद मंगल साजा।

देखन भी आए शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।

बालक देखन चाहत नाहीं॥

गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो।

उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥

कहत लगे शनि मन सकुचाई।

का करिहौं शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास उमा उर भयऊ।

शनि सों बालक देखन कहयऊ॥

पड़तहि शनि दृग कोन प्रकाशा।

बालक सिर उड़ि गयो आकाशा॥

गिरिजा गिरी विकल ह्वै धरनी।

सो दुख दशा गयो नहिं वरनी॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा।

शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए।

काटि चक्र सों गज सिर लाए॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो।

प्राण मंत्र पढ़ि शंकर डारयो॥

नाम गणेश शंभु तब कीन्हे।

प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।

पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन भरमि भुलाई।

रचि बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।

तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कही शिव हिय हरषे।

नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।

शेष सहस मुख सके न गाई॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी।

करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुंदर प्रभुदासा।

लभत जगत में यश प्रकाशा॥

image 23

॥ दोहा ॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करे धर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै, लहै जगत सम्मान॥

|| जय श्री गणेश ||

Subscribe Now  For More articles.

You may also like

Leave a Comment