॥ दोहा ॥
जय जय रामदेव प्रभु, जय अजमल घरधाम।
दीनन के तुम सहारे, संकट हरन राम॥

॥ चौपाई ॥
जय रामदेव पीर प्रभु स्वामी।
सुखदाता तुम अंतर्यामी॥
अजमल घर अवतार तुम्हारा।
रूणिचा धाम किया उजियारा॥
माता मैनादेवी के लाला।
भक्तन के तुम रखवाला॥
पीर रूप धरि जग में आए।
हिंदू मुस्लिम सबहि रिझाए॥
दीन दुखी के कष्ट मिटावो।
सच्चे मन से जो ध्यावे पावो॥
लीला अनेक जगत में कीन्ही।
नाम तुम्हार जगत में लीन्ही॥
भक्तन हेतु चमत्कार दिखाए।
अंधे को तुम दृष्टि दिलाए॥
लंगड़े को तुम चलना सिखलाए।
निर्धन को तुम धन दिलवाए॥
संतन संग सदा सुख पावो।
भक्तन के संकट हरि जावो॥
नर नारी जो नाम तुम्हारा।
लेते सदा हो उद्धारा॥
रूणिचा धाम पावन भारी।
जहां बसत हैं पीर हमारे॥
दर्शन को जो वहाँ पर जावे।
मनवांछित फल वह पावे॥

भक्तजनो के तुम रखवाले।
संकट हरन दीन दुख भाले॥
जो कोई सच्चे मन से गावे।
उसके सब दुख दूर भगावे॥
भक्ति भाव से जो गुण गावै।
जीवन सफल वही बनावै॥
जय जय जय रामदेव दाता।
तुम बिन और न कोई त्राता॥
दीनन की तुम लाज रखावो।
संकट से तुम पार लगावो॥

॥ दोहा ॥
रामदेव चालीसा जो पढ़े, श्रद्धा सहित मन लाई।
सकल कामना पूर्ण हो, कृपा करहु रघुराई॥
|| जय रामदेव पीर ||
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